पेट के कीड़े सिर्फ बच्चों को नहीं, बड़ों को भी हो सकते हैं

पेट के कीड़े सिर्फ बच्चों को नहीं, बड़ों को भी हो सकते हैं

पेट के कीड़े सिर्फ बच्चों को नहीं, बड़ों को भी हो सकते हैं – जानिए डिवर्मिंग कब और क्यों जरूरी है

Highlights

  • पेट के कीड़े सिर्फ बच्चों की नहीं, बड़ों की भी आम समस्या है

  • शरीर का पोषण चुरा लेते हैं ये कीड़े, जिससे कमजोरी और एनीमिया हो सकता है

  • सही समय पर डिवर्मिंग और साफ-सफाई से इस परेशानी से बचा जा सकता है


हममें से ज्यादातर लोग यही सोचते हैं कि पेट के कीड़े सिर्फ छोटे बच्चों या गंदा खाना खाने वालों को ही होते हैं। लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग है। भारत जैसे देश में जहां धूल-मिट्टी, पानी और आसपास का माहौल जल्दी प्रभावित हो जाता है, वहां बड़े लोग भी आसानी से इस समस्या की चपेट में आ सकते हैं।

असल में पेट के कीड़े दिखने वाले कीड़े नहीं होते। इनके अंडे और लार्वा इतने छोटे होते हैं कि आंखों से नजर भी नहीं आते। ये मिट्टी, पानी, सब्जियों, फलों या हाथों के जरिए शरीर में पहुंच जाते हैं और फिर धीरे-धीरे शरीर के अंदर ही पनपने लगते हैं।

डिवर्मिंग क्यों जरूरी है?

जब ये कीड़े शरीर में पहुंच जाते हैं तो सबसे पहले हमारे पोषण पर असर डालते हैं। हम जो खाना खाते हैं, उसमें मौजूद आयरन, विटामिन-B12, प्रोटीन जैसे जरूरी पोषक तत्व ये कीड़े अपने लिए इस्तेमाल करने लगते हैं। इसका असर धीरे-धीरे दिखता है।

लंबे समय तक पेट में कीड़े रहने से ये दिक्कतें हो सकती हैं:

  • कमजोरी और जल्दी थकान

  • एनीमिया (खून की कमी)

  • पाचन की समस्या

  • इम्युनिटी कमजोर होना

  • वजन न बढ़ना या अचानक कम होना

कई बार लोग इन लक्षणों को सामान्य थकान या गलत खान-पान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि असली वजह पेट के कीड़े भी हो सकते हैं।

सिर्फ साफ खाना खाने से ही बचाव नहीं होता

बहुत लोग सोचते हैं कि घर का बना खाना खाने से कोई खतरा नहीं होता, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। अगर सब्जियां और फल ठीक से नहीं धोए गए, पानी साफ नहीं है या हाथों की सफाई का ध्यान नहीं रखा गया, तो इन्फेक्शन हो सकता है।

कुछ आम कारण जिनसे पेट में कीड़े हो सकते हैं:

  • मिट्टी के संपर्क में ज्यादा रहना

  • पत्तेदार सब्जियों को ठीक से न धोना

  • पालतू जानवरों के संपर्क में रहना

  • पब्लिक टॉयलेट का इस्तेमाल

  • नंगे पैर चलना

  • खाना खाने से पहले हाथ साफ न करना

पेट में कीड़े होने के लक्षण

शुरुआत में लक्षण बहुत हल्के होते हैं, इसलिए पहचानना मुश्किल होता है। लेकिन अगर ये समस्या लंबे समय तक रहे तो कुछ संकेत नजर आने लगते हैं:

  • बार-बार पेट दर्द या पेट फूलना

  • भूख कम लगना

  • बिना वजह थकान

  • बार-बार दस्त या कब्ज

  • वजन का न बढ़ना

  • गुदा के आसपास खुजली

  • बार-बार बीमार पड़ना

साल में कितनी बार डिवर्मिंग करनी चाहिए?

बच्चों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है, इसलिए डॉक्टर अक्सर उन्हें साल में 1–2 बार डिवर्मिंग की सलाह देते हैं, खासकर उन इलाकों में जहां संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।

बड़ों के लिए बिना सलाह के बार-बार दवा लेना सही नहीं माना जाता। अगर आपको पेट की समस्या बार-बार होती है, आप मिट्टी या जानवरों के संपर्क में रहते हैं या साफ-सफाई की स्थिति ठीक नहीं है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही डिवर्मिंग करवानी चाहिए।

क्या डिवर्मिंग की दवाएं सुरक्षित होती हैं?

आमतौर पर डिवर्मिंग की दवाएं सुरक्षित होती हैं, लेकिन कुछ लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए, जैसे:

  • प्रेग्नेंट महिलाएं

  • ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाएं

  • लिवर की बीमारी वाले मरीज

  • गंभीर एनीमिया से पीड़ित लोग

इन लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के दवा नहीं लेनी चाहिए।

दोबारा इन्फेक्शन से कैसे बचें?

डिवर्मिंग दवा पेट के कीड़ों को खत्म कर देती है, लेकिन अगर साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए तो ये समस्या फिर से हो सकती है। इसलिए कुछ आसान आदतें अपनाना जरूरी है:

  • हमेशा साफ पानी पिएं

  • सब्जियों और फलों को अच्छी तरह धोकर खाएं

  • खाना खाने से पहले हाथ जरूर धोएं

  • बाहर नंगे पैर चलने से बचें

  • साफ-सुथरे टॉयलेट का इस्तेमाल करें

सीधी बात ये है कि पेट के कीड़े कोई छोटी समस्या नहीं है। ये धीरे-धीरे शरीर को अंदर से कमजोर कर सकते हैं। इसलिए समय-समय पर जांच, सही सलाह और अच्छी hygiene से इस परेशानी से काफी हद तक बचा जा सकता है।

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