नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल जाने वाली लड़कियों की सेहत को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि मासिक धर्म (पीरियड) से जुड़ी सेहत को जीवन का मौलिक अधिकार माना जाएगा। इस फैसले का सीधा फायदा देश की करोड़ों छात्राओं को मिलेगा।
कोर्ट ने आदेश दिया है कि शहरों और गांवों के सभी निजी और सरकारी स्कूलों में लड़कियों को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराए जाएं। इसके साथ ही स्कूलों में साफ-सफाई और सुविधाओं को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अब सभी स्कूलों में:
लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग वॉशरूम होना जरूरी होगा
वॉशरूम में साबुन और साफ पानी की व्यवस्था ठीक से होनी चाहिए
छात्राओं के लिए मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराए जाएंगे
पीरियड से जुड़ी साफ-सफाई और स्वास्थ्य पर ध्यान देना अनिवार्य होगा
कोर्ट ने साफ कहा है कि यह सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि बुनियादी अधिकार है।
कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि जो स्कूल इस आदेश का अपने आप पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आदेश न मानने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द की जा सकती है
ऐसे स्कूलों पर कानूनी कार्रवाई भी होगी
सरकारी स्कूलों में इन व्यवस्थाओं को लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि:
3 महीने के अंदर इस आदेश के पालन की अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करें
यह बताया जाए कि कितने स्कूलों में सुविधाएं शुरू की गई हैं
किन जगहों पर अब भी काम बाकी है
यह ऐतिहासिक फैसला
न्यायमूर्ति जे. बी. पडरवाल और
न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने
जया ठाकुर की याचिका पर शुक्रवार को सुनाया।
कोर्ट ने कहा कि पीरियड से जुड़ी समस्याएं लड़कियों की पढ़ाई, आत्मसम्मान और सेहत तीनों को प्रभावित करती हैं, इसलिए इस पर गंभीरता से काम होना जरूरी है।
इस फैसले से:
गांव और छोटे शहरों की लड़कियों को बड़ी राहत मिलेगी
स्कूल छोड़ने वाली लड़कियों की संख्या कम हो सकती है
लड़कियों को पीरियड के दौरान शर्म या परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा
स्कूलों में साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर होगी
यह फैसला सिर्फ शिक्षा से नहीं, बल्कि लड़कियों के सम्मान और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है।
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