HighLights:
• ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका को सम्मान से बात करने की नसीहत दी
• यूरेनियम संवर्धन छोड़ने से साफ इनकार, NPT के अधिकार का हवाला
• खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की बढ़ती सैन्य तैनाती से तनाव और गहरा
ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान “ताकत की भाषा” को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा और उससे सम्मानजनक तरीके से बात की जानी चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय पर आया है जब दोनों देशों के बीच परमाणु मुद्दे पर ओमान में होने वाली बातचीत का दूसरा चरण शुरू होने वाला है।
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने साफ कहा कि ईरान को नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी (NPT) के तहत यूरेनियम संवर्धन करने का पूरा अधिकार है और इस मामले में देश किसी भी तरह के दबाव में नहीं आएगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि ईरान हमेशा सम्मान का जवाब सम्मान से देता है, लेकिन अगर उस पर दबाव बनाया जाएगा तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने ओमान में हुई पिछली बातचीत को एक सकारात्मक कदम बताया और संकेत दिया कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अपने अधिकारों से पीछे हटने वाला नहीं है।
ईरान के इस बयान के साथ ही खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी भी तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने हाल ही में USS Abraham Lincoln एयरक्राफ्ट कैरियर को अरब सागर में तैनात किया है। इसके अलावा कई लड़ाकू विमान और ड्रोन भी क्षेत्र में भेजे गए हैं।
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, सैटेलाइट तस्वीरों में जॉर्डन के मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस पर F-15 फाइटर जेट, MQ-9 रीपर ड्रोन और A-10C थंडरबोल्ट II विमान देखे गए हैं। वहीं USS Delbert D. Black डिस्ट्रॉयर स्वेज नहर से होते हुए लाल सागर की ओर बढ़ रहा है और MQ-4C ट्राइटन ड्रोन खाड़ी क्षेत्र में निगरानी कर रहा है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी माना कि अमेरिका अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि इससे ईरान डरने वाला नहीं है। उनका कहना है कि चाहे जितनी भी धमकियां मिलें, ईरान यूरेनियम संवर्धन का कार्यक्रम बंद नहीं करेगा।
तेहरान फोरम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि अगर युद्ध जैसी स्थिति भी सामने आती है, तब भी ईरान अपने इस अधिकार को नहीं छोड़ेगा।
एक तरफ दोनों देशों के बीच बातचीत की कोशिशें जारी हैं, तो दूसरी तरफ लगातार बढ़ती बयानबाजी और सैन्य गतिविधियां माहौल को तनावपूर्ण बना रही हैं। अमेरिका ने हाल ही में ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की कार्रवाई की आलोचना भी की है, जिससे रिश्तों में और खटास आई है।
फिलहाल हालात ऐसे हैं जहां एक तरफ बातचीत का रास्ता खुला है, तो दूसरी तरफ दोनों देश अपने-अपने रुख पर डटे हुए हैं। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि मामला सिर्फ कूटनीति तक सीमित रहेगा या आने वाले समय में यह टकराव और ज्यादा बढ़ सकता है।
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